Monday, 3 August 2020

♥️♥️♥️तुम से जिन्दगी 💞💞💞

तुम जब से जिन्दगी में मेरी,
शामिल हुए,
तो, आसमान से उतर,
तारे ...सारे,
कदमों में मेरे झिलमिल हुए.....

तुम जब से जिन्दगी में मेरी,
शामिल हुए,
तो, पैगाम-ए-मोहब्बत,
जर्रे ...जर्रे से,
हमें हासिल हुए......

तुम जब से जिन्दगी में मेरी,
शामिल हुए,
तो, मंझधार में भी,
कश्ती को ..मेरी,
हासिल साहिल हुए....

तुम जब से जिन्दगी में मेरी,
शामिल हुए,
तो,रास्ते ख़ुद ब ख़ुद,
कदमों तले ..मेरे,
आकर मंजिल हुए.....

तुम जब से जिन्दगी में मेरी,
शामिल हुए,
तो,दुनिया में हम
तेरी वज़ह ...से,
और नाम से तेरे फ़ाज़िल हुए......

तुम जब से जिन्दगी में मेरी,
शामिल हुए,
तो, एक तेरे होने से,
बसससस....
हम हर शय् को मात,
देने के काबिल हुए....!!!!! 

✍नेहा चौधरी की क़लम से 🙏🙏🙏

Monday, 13 July 2020

आईने का सच

एक आईना, 
पहचान बताएं,
दुनिया की खूबसूरती,
नैनो में समाएं.....

एक आईना,
हकीकत बताएं,
सच अपने चेहरे का,
बस अपने को नज़र आए......

एक आईना,
जो याद दिलाता हैं,
भयानक अहसास,
गला था जब चेहरे का मांस......

एक आईना,
जिसमें छुपा हैं,
एक सिरफिरें का राज़,
इश्क़ के नाम पर गिराई जिसनें गाज़.....

एक आईना,
जिसनें परत दर परत,
गिरतें देखा,
गरम लावा कोमल सी देह पर.....

एक आईना,
जिसनें करूण रूदन देखा,
इश्क़ के नाम पर,
वहशीपन देखा.....

एक आईना, 
जो परदा उठाएं,
जिन्दगी के कठोर धरातल पर,
धम्म से पटक जाएं.....

 एक आईना,
जो हौसला दिलाएँ,
बातें पुरानी भूल,
जीने की राह दिखाएं......

एक आईना,
जो यें बताएं,
हर हाल लड़ते रहों,
चाहे कैसे भी मौसम आए.....

एक आईना,
जो जले हुए चेहरे पर,
दुनिया जहां का,
विश्वास जगाएं......

एक आईना,
जो एक नामर्द के लिए, 
श्राप बन जाएं,
और सबक सात जन्मों का उसको सिखाएं......

एक आईना एसिड अटैक का गवाह बन जाएं,
हंसती खेलती एक जिन्दगी पर पुर्णविराम लगाएं.....

एक आईना जो,
गुहार लगाएं,
न जलाओं एक चेहरे को,
क्या हुआ जो एक तरफा प्यार गर वो क़ुबूल न कर पाएं....... !!!!!!

✍✍नेहा चौधरी की क़लम से  🙏🙏🙏🙏

Wednesday, 1 July 2020

कुसूरवार कौन????

पूजा को अचानक मंडप में आया देख लोगो में खलबली मच गई....!!!!पर पूजा चुपचाप जाकर एक कोने में खड़ी हो गई......लोगों ने बातों की, इल्जामो की, और व्यंग बाणों की झड़ी लगा दी.....

कैसी लडकी हैं????इतना सब करके भी जी नहीं भरा!!!!!

हाँ सही कहा....मैंने तो सुना हैं, अपनी मरज़ी से गई थी उस दिन यें.....!!!!

हाँ क्या?????हाँ तभी तो!!!!!! दिन-दहाड़े कैसे कोई जबरदस्ती ले जा सकता है?????

अरे बहन.....इसके तो रंग ढंग ही अलग से हैं....
कितनी बार तो मैंने देखा है इसे आधी आधी रात को घर आते हुए......और तो और कपड़े देखे हैं कभी इसके....ओछे ओछे बेढंगे....

अरे कपड़े तो रहने तो जब देखो तब हँस हँस कर बाते करती थी सबसे अब लोग तो गलत ही समझेंगे ना.....!!!!

आज देखों कैसी भोली और बेचारी बन कर खड़ी हैं??? आज कैसे सलवार कमीज़ पहनें हुए हैं?????

इसे आना ही नहीं था शादी जैसे अच्छें काम में.....!!!!!

लोग जाने क्या क्या बात करते रहे......पूजा के बारे में......

क्यूँ????शायद आप समझ ही गए होंगे?????

जी हाँ पूजा के साथ वो हुआ था जिसका नाम लेना भी सभ्य समाज में वर्जित हैं........बलात्कार......!!!!!

लोगों की सारी बातें गौतम सुन रहा था....गौतम....पूजा का बड़ा भाई जिसकी आज शादी थी....पूजा तो आ ही नहीं रहीं थीं पर गौतम....और उसकी होंने वाली वाइफ मानसी ने पूजा को कसम दे दी थीं कि वो नहीं आएगी तो शादी करेंगे ही नहीं.....अपने इकलौते भाई की शादी में आते हुए पूजा का कलेजा मुंह को आ रहा था...क्यूँकि वो एक रेप विक्टिम थी.......

गौतम और मानसी पूजा का हाथ पकड़कर अपने साथ स्टेज पर ले जाते हैं.......

Ladies and gentlemen......May I have your attention please......गौतम ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने कहा.......अब मैं जो कहने जा रहा हूँ, वो  बात आप लोगों को शायद ठीक ना लगें पर कहना जरूरी हैं.......क्यूँकि कारण आप लोगों ने ही दिया है.....आप लोगों को शायद लगता है कि मेरी बहन पूजा.....चरित्रहीन हैं!!!!!क्यूँ...सही कहा ना????

यें ....तेइस बरस की लड़की जो कि पेशे से एक डाक्टर हैं.....इसे रात बिरात कभी भी हाॅस्पीटल जाना पड़ता हैं और हाॅस्पीटल से घर आना पड़ता हैं.....क्यूँकि....इसके पेशेंट को इसकी जरूरत होती हैं और यें एक बहोत ही जिम्मेदार और होनहार डाक्टर हैं......पूजा की ओर देखते हुए गौतम ने कहा......

जी हाँ सही कह रहे हैं गौतम......मानसी बोली.....मेरी पूजा हर किसी की मदत करने के लिए आगें रहतीं हैं हमेशा.....उस दिन भी......गहरी साँस ले मानसी ने कहा.....उस दिन यें हस्पताल से घर आने निकली रहीं  थी.....शाम चार बजे के आसपास.....इतनें में एक पचास साल के करीब के आदमी ने इससे कहां कि उसे अभ्यंकर नगर के पास छोड़ दें.....उसकी बीवी को हस्पताल में भर्ती कराया गया है और जल्दी जल्दी में कुछ समान लेकर नहीं आ पाया...उसके घर में उसकी बीवी के अलावा कोई भी नहीं हैं और जो उसकी मदत कर सकें ....और वो काफी देर से खड़ा हैं उसे कोई भी सवारी नहीं मिल रहीं हैं.....और वो घर जाकर जरूरी सामान लाना चाहता हैं...... बस यही गलती कर बैठी पूजा......कि भरोसा कर लिया.....पिता की उम्र के एक आदमी पर.....

उसे वो अभ्यंकर नगर स्थित उसके घर ले आई......वापस जाने मुड़ ही रहीं थी के उस आदमी ने....इसके सर पर जोरदार वार कर इसे बेहोश कर दिया.....और फिर.......!!!!!!!

क्या कसूर था इसका????भरोसा करना बाप की उम्र के एक आदमी पर....!!!!!उस आदमी ने न केवल इसका रेप किया बल्कि इसको दो दिन बंधक बना कर रखा......और पूरे दो दिन तक इसकी आबरू तार तार करता रहा......वो तो नशे की हालत में उस आदमी ने रूम का दरवाज़ा खुला छोड़ दिया जिससे ये वहाँ से भाग निकली.....आप सोंच भी नहीं सकतें क्या बीती होगी इस पर.....मैं दिखाऊँ आपकों?????यें देखिये.....कहतें हुए मानसी  ने पूजा की कुर्ती की आस्तिन फाड़ दी....पूजा की पूरी बाँह पर दाँत काटे के निशान थें और एक दो जगहों पर पूरा मांस खाया था.......!!!!

देखिये ये हैं इस के घाव.....यें तो कुछ भी नहीं.....इसके अंगों को तक को खा गया वो दरिंदा और आप कहतें है अपनी मर्जी से गई थी......!!!!!!

जो दर्द....जो पीड़ा.... इस मासूम ने सही हैं ना आप और मैं कल्पना भी नहीं कर सकते!!!!!तन के घाव पर तो मरहम लगाया जा सकता है पर मन के घावों पर???????

जब जब यें बाहर निकलेंगी आप जैसे समाज़ के ठेकेदार इसे नोच नोच कर खाएंगें बातों से....नज़रो से......
इसका रेप हुआ हैं मतलब अब यें सबके लिए "Easily Available" हो गई??????कोई भी आओं.....जो करना है करो और चलतें बनों.....!!!!!!

धिक्कार है आप लोगों की सोंच पर.....क्यूँ जीयें यें एक बेचारी की जिन्दगी?????किस कसूर की सज़ा भुगते??????क्या बुरा किया अपने इकलौते भाई की शादी में आ गई तो.....वो तो एक आदमी था जिसनें इसकी इज्ज़त लुटी थी.....यहाँ और कहीं भी.....जाने कितने आदमी और औरतें हैं जो अब रोज इसकी इज्ज़त लुट रहें हैं.......!!!!!आप लोगों की सोंच पर तरस आ रहा हैं......

सहमी सी....सिसकती सी पूजा को गले लगाते हुए मानसी ने कहां.....गौतम हमारी दुनिया तो बस हमारा परिवार हैं ना......इस दोगली दुनिया से हमें क्या करना.....यें हो तो ठीक....ना हो तो ठीक....

मानसी का इशारा समझतें हुए गौतम ने आए हुए मेहमानों को कहां आप सब आए....आप सब का शुक्रिया.....कृपया कर खाना खा कर ही जाएँ.....आप जैसों के आशीर्वाद की हमें कोई जरूरत नहीं.....और हो सके तो किसी लड़की के चरित्र का विश्लेषण करने की कोशिश भी ना करें.....हर किसी के चरित्र विश्लेषण करने का ठेका ना लें.......और फिर भी करना ही हैं विश्लेषण......तो सम्मान के लिए और ग़लत के खिलाफ़ आवाज़ उठाने वाली लड़की.....चरित्रहीन ही ठीक हैं.......जिससें वो बेखौफ़ हो लड़ सकें......हम हमारी बच्ची के साथ भी हैं और पीछे भी हैं.....इसीलिए बेहतर यहीं होगा कि आप सब.......

गौतम और मानसी के प्यार नें पूजा को नई उम्मीद और हिम्मत से भर दिया और रोते रोते भी वो मुस्कुरा उठीं।।।।

||समाप्त||


एक बार फिर

आज फिर मझधार में हैं,
आज फिर किसी के इंतजार में हैं
आज धुँधला सा है, मंज़र सारा,
आज फिर जिंद परेशान सी हैं.......

आज कदमों में जान नहीं,
आज फिर दिल में कोई अरमान नहीं,
आज रूह से डोर कटी सी हैं,
आज फिर जिस्म में जान नहीं.......

आज एक सवाल ज़ेहन में हैं,
आज फिर किसी सवाल का जवाब नहीं,
आज दूर क्षितिज पर हैं एक सपना,
आज फिर टूटने की चुभन सी हैं......

आज भटक रहें साहिल पर,
आज फिर आहट तुफान की हैं,
आज चंद पलों के फ़ासले,
आज फिर दूरी जमी-आसमान सी हैं ....

आज शाँत गहरा सागर हैं,
आज फिर दरक गयीं हसरतें,
आज फिर दिख रही है मंजिल,
आज फिर राहें सुनसान सी हैं......

आज वक्त ने चलीं है चाल,
आज फिर आरज़ू बेहाल सी हैं,
आज फिर बटोरने लगीं हूँ ख्वाब,
आज फिर मुट्ठियों में  ख़्वाहिश.....रेत सी हैं!!!!!!

✍✍नेहा चौधरी की क़लम से

🙏🙏🙏


Monday, 29 June 2020

# एक लेखक का दर्द......

#एक लेखक का दर्द.....

दर्द का दरिया,
अक्सर आँखो से बहता है,
मासूम सा दिल,
जाने कितनी चोट सहता है....

लुट के ले गए,
उस सौगात को,
जो हमारा था ही नहीं,

जो हमने सुना,
खामोशी से,
किसी ने कभी कहा ही नहीं.....

उन रास्तों पर,
जाती हैं नजरें.....
जहाँ से कोई आता ही नहीं.....

सवाल सी उठी हैं,
एक चिंगारी.....
जवाब कोई कहीं से आता ही नहीं.....

एक सोंच से निकलता,
हैं, जीवन...
एक सोंच पें ठहरा जाता ही नहीं......

गुज़रते हैं उन बस्तीयों,
से अक्सर.....
जिनमें कोई झाँकता तक नहीं......

पागल कहलाती हूँ,
जमाने में,
समझदारो का साथ रास आता ही नहीं....

मेरी दुनिया शब्दों,
में मेरे,
बहरी दुनिया से मुझे कोई वास्ता ही नहीं......

एक पहचान है,
गुमनाम सी,
शौहरत से मेरा दूर तक कोई राब्ता नहीं....!!!!!  

✍✍नेहा चौधरी की क़लम से 
 🙏🙏

Sunday, 28 June 2020

और कुहासा छँट गया......

            ....और कुहासा छट गया ......

पापा....अब मैं वहाँ कभी नहीं जाऊँगी....!!!!पापा वो इंसान नहीं जल्लाद है....उसका परिवार भी उसके साथ है हर कदम.....उन्हें बहू नहीं सिर्फ नौकरानी चाहिए.....देखिये पापा....कितना मारा है.....अपनी पीठ पर उभरी हुई लकीरें दिखाती हुई तपस्या बोली....

हाए राम.....कैसे मारा है मेरी मासूम सी बच्ची को....अभी तो इसके हाथों की मेहंदी भी नहीं छूटी हैं.... बेटी के जख्मो को देख बिलखते हुए रमा जी ने कहा....

क्या ग़लती थी माँ मेरी जानती हो?????मैंने काम वाली बाई को दो रोटी ज्यादा दे दी थी....उसकी मासूम सी बच्ची के लिए.....और मेरी जेठानी ने देख लिया रोटी देते हुए.....सुबकते हुए तपस्या बोली.....माँ क्या मुझे इतना भी हक नही है????आप तो हमेशा कहती थी ना....अपने घर जाकर कुछ भी कर सकते हैं?????माँ क्या वो घर मेरा नहीं हैं?????माँ कौन सा है, "मेरा घर".....ये जहाँ से मैं विदा कर दी गयी हूँ या वो घर जहाँ ब्याह कर मैं गई हूँ......कौन सा है?????बताओं ना माँ......

दो रोटी ज्यादा देने पर मुझे जाने कितनी बातें सुना दी!!!सबके सामने जलील किया किया गया....और उस पर भी मन नहीं भरा तो बेल्ट बेल्ट से मारा.....सब देखते रहे माँ किसी ने नहीं रोका समीर को......माँ....मैं बाप के घर से नहीं लाई थी ना वो रोटियां ना मैं कमाती हूँ जो मुफ़्त में  उड़ा रहीं हूँ माल.......माँ.....मुझे सबक सिखाने की जरूरत थी....इसीलिए बस बेल्ट से मारा गया और कल से एक दाना नहीं दिया गया......माँ अगर आज आप और पापा नहीं आते मिलनें तो मैं यूँ ही बिलखती रहतीं......

चुप हो जा बेटा......हम ने सपने मे भी नहीं सोंचा था राणावत परिवार इतना गिरा हुआ निकलेगा....वो तो पता नहीं आज मन बहुत बेचैन हो रहा था.....मुझे क्या पता था  कि इस बेचैनी की वजह तू है.....

आज तक आपनें और पापा ने मुझे ऊँगली तक नहीं और उसने मुझे जानवरों की तरह मारा.....क्या अपनें मान सम्मान के लिए आवाज़ उठाना बदचलनी हैं?????क्यूँ मेरे सामने आप लोगों को इतना कोसा गया????क्या कमी रखी थी आप लोगों ने मेरी शादी में???जो माँगा वो दिया.....जानती हो माँ....दो वक्त की रोटी के बदले सुबह से शाम तक काम करो और उस पर भी उनका मन नहीं भरता तो पापड़...बड़ी.....और न जाने क्या-क्या करते चले जाओ.......मर मर के करने के बाद भी कभी तारीफ के दो बोल तक नहीं निकले उन लोगों के मुँह से कभी.....वो सब तो ठीक है माँ.....पर बिना ग़लती के इतना मारना....????

पापा.....प्लीज पापा....मुझे मत भेजना वहाँ वापस.....मैं इस घर की बेटी हूँ ना पापा.....जैसे भाई है वैसी ही मैं हूँ ना .....आप ने कभी मुझ में और साहिल मे फर्क नहीं किया......

तपस्या....बेटा तू कहीं नहीं जाएगी.....तू तेरे घर में रहेंगी.....हक से..... मैंने मेरी बेटी राणावत परिवार में ब्याही है उनकों बेची नहीं थी.....अब मैं समीर राणावत को समझाऊँगा कितनी बड़ी गलती की है उसने!!!!!

पर दुनिया क्या कहेगी???रमा जी बोली....

दुनिया के कहने के डर से बेटी को मरने नहीं छोड़ सकता......तपस्या भूल जा बेटा कि तेरी शादी हुई भी थी कभी???और कल से ही जुडिशियल एक्साम की तैयारी में लग जा.......उठ बेटा.....ये सोच तेरे शरीर मे एक छोटी सी फांस लगी थी....शादी नाम की....शादी जरूरी हैं पर शादी के नाम पर बर्बाद होना.....नहीं बेटा.....तेरा बाप इतना कमज़ोर नहीं है......जो तुझे जीवन भर के लिए रोने छोड़ दें........कहतें हुए प्रदीप जी ने तपस्या को गले से लगा लिया.....

और तपस्या की जिन्दगी पर छाया कुहासा छँट गया.......














Saturday, 27 June 2020

अंधेरे से उजाले की ओर

         #अंधेरे से उजाले की ओर....!!!

भोर के तारे संग,
उदित होतीं...मैं,
देख प्रकृति का
अल्हड़पन,
खिल उठतीं हूँ।।  ।।

माटी की सौंधी महक से,
महक उठती....मैं,
सूरज की लालिमा संग,
दहक उठती हूँ ।। ।।

घड़ी के गज़र से,
पग पग मिलाती.... मैं,
आठों पहर सी,
सजग प्रहरी हूँ ।। ।।

हवा के गर्म थपेड़ो से,
पल पल झुलसती....मैं,
आस्था के बाजार में,
विरहणी नास्तिक हूँ ।। ।।

मेले और बाज़ारों में,
निपट अकेली...मैं,
दुनिया के मेले में,
एक मुसाफिर....हूँ।। ।।

कठपुतलियों सी,
नाचती...मैं,
कठपुतलियों की डोर,
कहाँ हैं, खोजती हूँ...।। ।।

काँटों भरी राहों पर,
चलती...मैं,
मंजिल की तलाश में,
भटकती हूँ.....।। ।।

अंधे से एक मोड़,
सा जीवन जीती.. मैं,
अंधेरे से उजाले की ओर,
खिंचती हूँ....।। ।।

थककर बैठ गई,
हूँ मैं.....
चलो अब एक,
अंतिम यात्रा करतीं हूँ।। ।।

✍✍नेहा चौधरी की क़लम से

🙏🙏🙏